Wednesday, July 1, 2009

कविता की तलाश (मनोहर काजल के फोटोग्राफ को देखते हुए)

साथियों ,

मेरे प्रिय फोटोग्राफ़र श्री मनोहर काजल (दमोह) के फोटोग्राफों ने मुझे हमेशा प्रभावित किया है। उनका एक फोटोग्राफ भोपाल से प्रकाशित होनेवाली पत्रिका 'कला समय' के कवर पर छापा था। उसने मुझे बहुत आकर्षित किया। उसपर कविता लिखकर 'कला समय' के संपादक मित्र श्री विनय उपाध्याय को भेजी। उन्होंने उसे प्रकाशित कर दिया। आज उस कविता को पुनः पढ़ा। सो, वह कविता आपके लिए भी यहाँ दे रहा हूँ:-

कविता का शीर्षक है -

कविता की तलाश

(मनोहर काजल के फोटोग्राफ को देखते हुए)

कविता की तलाश

वहाँ ख़त्म नहीं होती

जहाँ

किसी राजकुमारी की भांति

सज संवरकर बार्बी गुडियाओं का मेला सजाती है

कोई माता पिता की दुलारी ।

कविता मिलती है

ढोलक की थाप पर

कंडे बीनते-बीनते

नृत्य करने के लिए उत्सुक

फटेहाल लड़की की

भदेस काया के इर्द-गिर्द ,

जहाँ चेहरे पर उतर आता है

सारा अवसाद जीवन का ।

वह एक कविता

वहाँ भी नहीं मिलती

जहाँ

ब्रेड पर लगा माखन पसंदीदा न होने पर

तूफ़ान खड़ा कर देता है लाडला ।

कविता मिलती है वहाँ जहाँ

फूस के घर के पिछवाडे

करतब दिखने की रियाज में

भूखे पेट

ढोलक पर

हाथ आजमा रहा होता है

सर पर बांधे पीढियों का बोझ

कोई अनपढ़ गंवई

नंगे पैरों वाला

'कलाकार लड़का' ।

- अमी चरण सिंह

(लिखी १२-१०-२००१)

1 comment:

  1. Kajal ji ke photogrphs dekhna vaqui kisi kavita ko dhondhna ore padhe ke saman hi hote hain !

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